सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

देश की सुरक्षा के लिए सेना के साथ समाज की एकजुटता भी है आवश्यक : आलोक कुमार

Alok Kumar
आलोक कुमार
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयादशमी के अवसर पर आज टाउन हॉल स्थित कम्पनी बाग में शस्त्र पूजन किया. अपने नए गणवेश में पहली बार देश की राजधानी में स्वयंसेवकों ने एतिहासिक चांदनी चौक, जामा मस्जिद, लाल किला, नई सड़क तथा टाउन हॉल से पथ संचलन निकाला. मार्ग में प्रत्येक समुदाय के लोगों ने स्वयंसेवकों का पुष्प वर्षा से स्वागत किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रान्त के सह संघचालक श्री आलोक कुमार ने इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में लोगों को संबोधित किया.

अपने उद्बोधन में श्री आलोक जी ने प्रधानमंत्री जी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार का विजयादशमी का पर्व थोड़ा विशेष है. क्योंकि उरी में जब सोते हुए भारतीय सैनिकों पर कायराना हमला हुआ तो इस बार पूरे देश ने उसका उत्तर दिया है. विजयादशमी के इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्री राम चन्द्र जी का स्मरण करते हुए कहा की श्री राम जी ने राक्षसों के आतंक को समाप्त करने के लिए सेना बनाई , सेना बनाने के बाद किसी एल.ओ.सी या इंटरनेशनल बार्डर की चिंता नहीं की , समुद्र पर पुल बनाकर समुद्र के पार गए और आज के दिन रावण को मार कर धरती को राक्षसों के आतंक से मुक्त किया. जितने सैनिक और सिविलियन युद्ध में नहीं मारे जाते उससे कही ज्यादा आतंकवाद के इस छदम् युद्ध में मारे गए, फिर एल.ओ.सी का क्या मतलब है. दुश्मन जहां है वहां जाकर भारत ने पहली बार उन्हें समाप्त करने का कदम उठाया है इसलिए इस सीमा उल्लंघन से इस बार का विजयादशमी का दिन हम सबके लिए एक विशेष आनन्द का दिन हो गया है. यह एक लम्बी लड़ाई है इसके लिए सेना के साथ समस्त समाज की एकजुटता आवश्यक है. 
आलोक जी ने कहा की आज से 90-91 वर्ष पहले 1925 में विजयादशमी के दिन पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार जी ने कहा था कि देश की सरक्षा , देश का स्वातन्त्र्य देश का विकास , केवल सरकारें, सेनाएं ही नहीं करतीं अपितु यह समाज का संगठित सामूहिक बल , एकरस समाज  से प्राप्त होता है जिससे देश परम वैभव को प्राप्त करता है. पूरे समाज को समरस करने के लिए ही आज के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना डॉ. हेडगेवार जी ने की थी. उस समय की सामजिक परिस्थिति पर प्रकाश डालते हुए आलोक जी ने डॉ. अम्बेडकर के जीवन से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया. जब वो स्कूल में पढ़ने गए तो सार्वजनिक स्थान से भीम राव वहां से पानी नहीं ले सकते थे. जहां सब बच्चे अपना टिफिन रखते थे वहां वो अपना टिफिन नहीं रख सकते थे. वो संस्कृत पढ़ना चाहते थे तो उनके अध्यापक ने कहा कि मैं इसको संस्कृत कैसे पढ़ा सकता हूँ. कितना बड़ा भेदभाव था समाज के अन्दर. अपने ही समाज में अपना ही हिन्दू भाई , एक छोटा बच्चा जो संस्कृत पढ़ना चाहता है , पर उससे उसकी जाति पूछते हैं और नहीं पढ़ाते.
 
अलोक जी ने बताया की ऐसे समय में डॉक्टर हेडगेवार ने कहा हम सब भारत माँ के पुत्र हैं उसी भारत माता की कोख से पैदा हुए हैं यह फर्क कैसे हो सकता है , यह अन्तर कैसे हो सकता है. उन्होंने हम सबकी हिन्दू के नाते पहचान को मजबूत किया. जब महात्मा गांधी संघ के शिक्षा वर्ग में आए उस समय भोजन चल रहा था , कुछ लोग परोस रहे थे , पंक्ति में वितरण कर रहे थे. महात्मा गांधी ने अप्पाजी जोशी से पूछा यह कौन सी जाति के लोग हैं. अप्पाजी को पता ही नहीं था, उन्होंने कहा हिन्दू हैं इतना ही मालूम है , जाति मालूम नहीं है पूछते भी नहीं हैं. अब उस समय के वातावरण में जाति नहीं पता ऐसा सोचना भी बड़ा मुश्किल काम था. महात्मा गाँधी जी को नहीं पता था, महात्मा गांधी ने पूछा तुम में से महार कोई हो अगर तो खड़े हो जाओ. खाना खाने वाले , खाना बांटने वालों में से जो महार स्वयंसेवक थे वो खड़े हो गए. खाना बांटने वाले भी , महात्मा गांधी जी विश्वास नहीं कर सके कि यह परोस रहे हैं और बाकी लोग खा रहे हैं. कहने लगे अप्पाजी जो काम मैं नहीं कर सका , इतना स्वराज खंड चलाता हूं , इतना बड़ा काम करता हूं , डॉक्टर हेडगेवार ने कैसे किया. तो अप्पाजी ने कहा कि डॉक्टर हेडगेवार ने ऐसे किया कि आप पूछते हैं कि तेरी जाति कौन सी है-तेरी जाति कौन सी है फिर सबको बोलते हैं कि मिल के रहो. हम कहते हैं कि तुम हिन्दू हो न आओ मिल के रहो.

श्री आलोक जी ने देश में व्याप्त गरीबी पर चिंता प्रकट करते हुए कहा की देश में राजनीतिक लोकतंत्र तो है लेकिन आर्थिक लोकतन्त्र है क्या , कैसी भयंकर गरीबी है , कैसी अशिक्षा है. इस वर्ग के बच्चों के लिए 50 हजार से ज्यादा गांवों में एकल विद्यालय संघ द्वारा संचालित हो रहे हैं. जहाँ शिक्षक पूरे समय समय वहां रहते हैं. यह एकल विद्यालय उन बच्चों के लिए नहीं है जो स्कूल जाते हैं. यह एकल विद्यालय उन बच्चों के लिए है जो स्कूल नहीं जा सकते. खेत में काम करते हैं , दुकान पर काम करते हैं , मजदूरी करते हैं , चाय की पत्ती तोड़ते हैं , सुखाते हैं. यह बच्चे अपनी सुविधा से जब समय मिलता है तब वहां पढ़ने आते हैं. अपनी तपस्या के कारण एकल विद्यालय के शिक्षक उस क्षेत्र की सारी सामाजिक गतिविधियों का केन्द्र बन जाते हैं. 1 लाख 52 हजार सेवा कार्य किसी की आंख में आंसू नहीं रहने देंगे. अशिक्षा नहीं रहने देंगे. अभाव नहीं रहने देंगे. लेकिन यह यह समरसता से होगा.
 
श्री आलोक जी ने बताया जो स्थिति डॉ. अम्बेडकर के समय थी वैसी स्थिति तो आज नहीं है लेकिन छुआछूत देश से अभी तक समाप्त नहीं हो पाई है. संघ द्वारा अभी तेलंगाना में एक सर्वे किया गया. सरसंघचालक जी ने आह्वान किया था कि हर गांव के अन्दर कम से कम तीन बातें पीने के पानी का स्रोत , मंदिर और शमशान घाट यह सारे समाज का एक होना चाहिए. सर्वे किया तो मालूम पड़ा कि 20 प्रतिशत गांव अभी भी ऐसे हैं जहां शमशान घाट में अंतिम संस्कार से भी पहले जाति बतानी पड़ती है. अनुसूचित जाति का शमशान घाट शहर से दूर है , गांव से दूर है , उसकी ठीक से देखभाल भी नहीं होती. और किसी किसी गांव में तो दिन के समय , सूर्यास्त के पहले किसी सवर्ण के घर के आगे से अनुसूचित बन्धु का शव ले जाया नहीं जा सकता. रात्रि का इंतजार करना पड़ता है. यह दीवारें तो पूरी तोड़नी पड़ेंगी. छत्तीसगढ़ का प्रसंग उन्होंने बताया की वहां पर एक वनवासी संप्रदाय है , सब पद्धतियां हिन्दुओं के जैसी हैं. लेकिन वो अपने आपको हिन्दू नहीं मानते ,  पता चला की इतने समय से अंग्रेजों के प्रचार के कारण तथा पंडितों के द्वारा उस जाति के लोगों के घरों में हवन, पूजा-पाठ करने से मना करने के कारण वे स्वयं को हिन्दू नहीं मानते. ऐसे में ये बंधू अपने आप को हिन्दू नहीं कहते तो इसमें दोष उनका नहीं हिन्दू समाज में आई छुआछूत की विकृति का है जो मुगलकाल के समय आईं थीं. जाति सिस्टम , जाति व्यवस्था यह सड़ गल करके विकृत हो गई है , खराब हो गई है और शरीर में अगर कोई अंग खराब हो जाता है तो उसको काट कर फैंकना होता है. इसलिए अपने सरसंघचालक बालासाहेब देवरस ने कहा कि ‘ अगर छुआछूत पाप नहीं है तो दुनिया में कुछ भी पाप नहीं है ’ . यह काम अभी शेष है , इसको पूरा करना है.

इसलिए आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश का ही नहीं विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है. संघ में एक समरस समाज है ,   भारत माता के पुत्र के नाते से काम करते हैं. इसलिए संघ द्वारा देश में 1 लाख 52 हजार स्थानों पर सेवा के अनेकानेक प्रकल्प चल रहे हैं. किसी भी तरह के संकट में सबसे पहले स्वयंसेवक ही सहायता के लिए पहुँचते है.
 
श्रीनगर का हवाई अड्डा बनना था, हवाई पट्टी थी  पर वो इस लायक नहीं थी कि सेना के विमान उतर सकें, स्वयंसेवकों ने रात भर काम किया हवाई पट्टी तैयार हो गई. कमांडर हर्षित था उसने कहा आपने रातभर काम किया है बड़ा परिश्रम किया है बड़ी कृपा है आपकी और इतना पैसा हमारे मिलिट्री के फंड में इस काम के लिए है यह आप जिसको कहें मैं उसको सौंप देता हूं. स्वयंसेवकों ने समझा कि यह हमको लालची समझ रहे हैं या संघ को नहीं जानते. उन्होंने कहा कमांडर तुम हमको पारिश्रमिक ही देना चाहते हो तो हमें लाहौर ला कर दे दो. 

श्री आलोक जी ने ध्यान दिलाया की पूजनीय सरसंघचालक ने इस वर्ष सामाजिक समरसता और परिवार प्रबोधन का कार्य बताया है. प्रत्येक परिवार को एक वचन देना होगा कि हफ्ते में एक बार एक घंटे भोजन के समय सारा परिवार इकट्ठा रहेगा और उस समय टेलीविजन और फोन बंद कर देगा. अपने परिवार का हिन्दुत्व बनाये रखो. अपने जीवन को संयमित करना , अपनी आवश्यकताओं को संयमित करना , अपने कामों में समाज का विचार करना होगा. हिन्दू स्वभाव तो सबका विचार करता है , पहली रोटी माँ-बाप के लिए नहीं , भगवान के लिए भी नहीं , पहली रोटी गाय के लिए निकालता है. मैं हिन्दू हूं इसका अर्थ क्या है , मेरा परिवार , इसमें परिवारभाव का विकास, इसके लिए क्या करना , और पूरे समाज का ऐसा अभेद संगठन खड़ा करना कि अजेय शक्ति हो , शील हो , बल हो , और इसके आधार पर इस राष्ट्र का परम वैभव हम अपने जीवन में , अपनी आंखों के समक्ष देखें.
करोलबाग जिले के पांच नगर- चांदनी चौक नगर, रामनगर, पहाड़गंज नगर, गोविन्द नगर और करोलबाग नगर के 550 स्वयंसेवक शस्त्रपूजन तथा पथ संचलन में सम्मिलित हुए. इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक हरीश जी, रामलाल जी मुख्य रूप से उपस्थित थे.  
 

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