सोमवार, 25 जुलाई 2016

सेवा भाव समाज कार्यों के लिए आवश्यक

संवेदना, सहयोग समर्पण, तथा सेवा भाव समाज कार्यों के लिए आवश्यक - डॉ. बजरंग लाल गुप्त जी
Nistha
नई दिल्ली. महिलाओं और बच्चों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन निष्ठा के 7 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर डॉ. मुरली मनोहर जोशी, रा.स्व.संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंगलाल गुप्त तथा पंजाब केसरी की प्रबन्ध निदेशक श्रीमती किरण चोपड़ा ने निष्ठा की पुस्तकसशक्तिकरण का विमोचन किया। इस अवसर पर संगीतमय कार्यक्रम में वयोवृद्ध विख्यात गीतकार श्री संतोश आनन्द को सम्मानित किया गया। सिगनेचर ग्लोबल, जिंदल ओवरसीज तथा निष्ठा संगठन से जुड़ी अन्य उद्यम संस्थाओं के सहयोग से 23 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड आपदा में निष्ठा के माध्यम से सेवा कार्यों के लिए साध्वी विचित्रा रचना, डॉ. देवप्रकाश सेमवाल को भी सम्मानित किया गया।
रा.स्व.संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंगलाल गुप्त ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज एक सुन्दर संयोग है, शहीद शिरोमणि, महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद का आज जन्मदिन है। चन्द्रशेखर आजाद के मन में मां भारती को फिर से एक दिव्य, भव्य, समृद्धशाली, स्वावलम्बी भारत के रूप में देखने का सपना था, प्रश्न यह है कि उनका स्वप्न साकार कैसे हो? केवल सरकार की भूमिका इस स्वप्न को साकार करने में पर्याप्त नहीं होगी। सरकार से बड़ी भूमिका समाज, सामाजिक और सांस्कृति संगठनों की रहती है। समाज की समस्याओं, दुख-दर्द, आपदाओं को समझ कर  यह संगठन अपने कर्तव्य को अदा करते हैं या नहीं करते, इस पर देश का भाग्य और भवितव्य निर्भर करता है।निष्ठा यह जो कार्य कर रही है वह उसी भाग्य और भवितव्य को बनाने के लिए काम कर रही है इसलिए निष्ठा से जुड़े कार्यकर्ताओं को इसके लिए शुभकामना।
डॉ. गुप्त ने बताया कि सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन में जो काम करने के लिए लिए चार बातें ध्यान रखनी होती हैं। एक सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों में से काम करने वाले लोगों के मन में समाज की समस्याओं के प्रति संवेदना होनी चाहिए, समाज के कष्टों, समस्याओं को देखकर आपका मन नहीं पसीजता तो आप समाज का काम नहीं कर सकते। इसलिए पहली महत्वपूर्ण आवश्यकता है, ‘संवेदनशीलता हमारे मन में है कि नहीं। हमने व्यक्ति और समाज के बीच में ऑर्गनिक रिलेशनशिप माना है, जैविकीय सम्बन्ध माना है, यह सम्बन्ध यांत्रिक नहीं है। जैसे शरीर के किसी भी एक हिस्से में कोई कष्ट होता है तो समूचा शरीर बेचैन हो जाता है वैसे ही  परिवार, पड़ोस में किसी को कष्ट हुआ, देश के किसी इलाके में भूकम्प गया, बाढ़ गई तो शेष समाज के अन्दर उसके लिए संवेदना जगना स्वाभाविक है. हम  पत्थरदिल बनकर नहीं रह सकते. क्योंकि हमने समाज के साथ ऑर्गनिक रिलेशनशिप मानी है.
उन्होंने समाज कार्यों के लिए सेवा के भाव को दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु बताया. उन्होंने चिंता जताई कि  आजकल विश्व में अधिकतर सेवा कार्यों में सेवा कम हो रही है और सौदा ज्यादा हो रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द का इस सन्दर्भ में कथन बताया किसेवा करके बदले में कुछ प्राप्त करने के भाव तुम्हारे मन में है तो तुम सेवा नहीं कर रहे हो, सौदा कर रहे हो लोगों को अपने मन को टटोलकर देखना चाहिए कि जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस सेवा कार्य के बदले में कुछ प्राप्त करने का मन में भाव तो नहीं गया। वह नहीं आना चाहिए। डॉ. बजरंग लाल गुप्त ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक पूजनीय श्री गुरुजी कहा करते थेकम वर्क साइलेंटली एंड गो अवे। समाज का काम करने वाले लोगों को तीन सूत्र ध्यान में रखना चाहिए। समाज के लिए आना और चुपचाप काम करना। वर्क साइलेंटली एंड गो अवे। हमारे पुरखों ने इसको सरल भाषा में कहा था - ‘नेकी कर और कुंए में डाल तो सेवा का भाव यह दूसरा होना चाहिए।
सेवा कार्यों से जुड़े लोगों के लिए डॉ गुप्त ने तीसरा भाव बताया किसहयोगका भाव होना चाहिए। एक आदमी कितना भी बड़ा सम्पन्न होगा, लेकिन अकेला कर सकता है क्या? कर सके तो भी नहीं करना। यह भी भारतीय परम्परा का हिस्सा है. अकेले के काम करने में हो सकता है सफलता मिल जाए, पर अहंकार सकता है। सब ने मिलकर के काम किया तो अहंकारशून्यता आती है। मैं कौन होता हूं करने वाला, समाज है, समाज का काम समाज के द्वारा होता है। यह भाव कब बना रहेगा, जब सहयोग होगा। यह परम्परा है भारत की। बहुत सारी संस्थाएं आरम्भ में बढ़े जोश के साथ प्रारम्भ होती हैं, बाद में बिगड़ जाती हैं। क्यों, क्योंकि परस्पर संघर्ष हो गया, आपस में मनमुटाव हो गया, होड़ लग गई श्रेय लेने की, सहयोग समाप्त हो गया, संस्था समाप्त हो गई। इसलिए तीसरी बात बिलकुल ध्यान में रखना है कि सहयोग का भाव हो।
सेवा कार्यों में कार्यकर्ता का  समर्पण यह चौथा महत्वपूर्ण बिंदु डॉ. गुप्त ने बताया। शक्ति, बुद्धि, योग्यता, साधन, सम्पन्नता और समय ऐसी पांच बातों का समाज के कार्यों के लिए समर्पण होना चाहिए। यह थोड़ा कठिन है, श्रमसाध्य है, मेहनत करना पड़ता है, मन को मारना पड़ता है। अपनी प्राइरोटीज में, प्राथमिकताओं में ऐडजस्टमेंट करना पड़ता है। शक्ति, बुद्धि, योग्यता को समर्पित कर सकें इसके लिए समर्पण के भाव अपने भीतर अधिकाधिक जगना चाहिए।
डॉ. बजरंगलाल गुप्त ने श्री आदर्श गुप्ता एवंनिष्ठा के समस्त कार्यकर्ता सहयोगियों को इसी भावना के साथ मिलकर के काम करने के लिए धन्यवाद शुभकामना दी. उन्होंने निष्ठा को देश और समाज में और अधिक योगदान देने के लिए और सशक्त और समर्थ बनाने के कामना प्रकट की.
डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी ने बताया कि जिस रूप में निष्ठा संगठन कार्य कर रहा है वे सेवा का भारतीय स्वरूप है वह पश्चिम के सेवा के स्वरूप से भिन्न है। सेवा के पष्चिमी स्वरूप में सेवा के माध्यम से व्यापर को बढ़ाना और व्यापारिक सम्बन्धों को स्थापित करना होता है। विभिन्न क्लबों द्वारा जनसम्पर्क बढ़ाकर सेवा के माध्यम से अपनी अच्छी बनाकर अपने व्यापार को गति देना पष्चिमी देशों में होता है। भारत में ऐसा नहीं है, भारत में हमको अवसर मिलता है कि हम किसी की सेवा कर सकें। हम इसके लिए अपने को उपकृत समझते हैं कि वह हमारे पास आया। हमारे यहा दरिद्र नारायण कहा गया है, अर्थात सेवा को पूजा से जोड़ा गया है। जो कोई वंचित, निर्धन, साधनहीन सामने आया है वह हमारे लिए नारायण का रूप है, उसकी सेवा हम नारायण की पूजा के रूप में करते हैं। इसलिए सेवा की भावना वास्तव में पूजा है। इस भावना को लेकर जब हम आगे बढ़ते हैं तो हमारा उद्देश्य, काम करने का तरीका, हमारी भावना, हमारी धारणा, हमारा दृष्टिकोण बिलकुल बदल जाता है और सेवा के कार्य से कुछ प्राप्ति की भावना ही नहीं रहती। नाम मिलेगा, यश मिलेगा, इसकी भावना नहीं रहती। इसमें हमें आनन्द मिलता है कि हमे साधन मिला और उसका सदुपयोग करने का हमें अवसर मिला। यह कितने लोगों को दुनिया में मिल सकता है, कितने लोगों की आज यह स्थिति है कि वह इतने सम्पन्न हैं कि इस अवसर का सदुपयोग करें। आज यह प्रश्न है कि अधिक से अधिक लोग सेवा कार्य के लिए कैसे सक्षम बनें। साधन अर्जित करने वाले सैकड़ों हाथ है तो उन्हें जरूरतमंदों को बांटने वाले हजारों हाथ होने चाहिए। समृद्धि सारे समाज के लिए आनी चाहिए। लेकिन  आज दुनिया में ऐसा नहीं है 20 प्रतिशत लोगों के पास समृद्धि और साधन हैं तो 80 प्रतिशत लोगों को उसकी तलाश है। यह विषमता कम करनी चाहिए। जिनको साधन और समृद्धि मिली है वह समाज से मिली है इसलिए उनको समाज कल्याण के लिए उसका सदुपयोग करना चाहिए। निष्ठा का यह प्रयास प्रसंशनीय है जो समाज के प्राप्त साधनों का समाज के लिए प्रयोग कर, अपने देश में सेवा की प्राचीन परम्पराओं, सेवा के भामाशाह जैसे उदाहरणों को समाज के सामने रखकर उनके मार्ग पर चल रही है।
कार्यक्रम के आरम्भ में वृत्तचित्र के माध्यम सेनिष्ठाद्वारा उत्तराखण्ड के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में चलाए जा रहे शिक्षा, व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र, स्वास्थ्य, ग्रामीण क्षेत्रों में मूल्य संवर्धित उत्पाद प्रशिक्षण आदि सेवा कार्यों को बताया गया।
प्रसिद्ध समाज सेविका तथा पंजाब केसरी की मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमती किरण चोपड़ा ने इस अवसर पर आह्वान किया कि हम कम से कम अपने जीवन का 25 प्रतिशन समाज सेवा या एक दूसरे का भला करने के लिए लगाएं और अपनी कुल इनकम का कम से कम एक प्रतिशन या दस प्रतिशत समाज सेवा के लिए लगाएं तो आपका जीवन सफल होगा।
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण हो चुका है। महिला के बिना कोई परिवार, समाज, देश नहीं है। लेकिन समाचारों, अखबारों में जब महिलाओं के बारे में छपता है तो लगता है कहीं कहीं कमी है। आज किसी भी क्षेत्र में महिला पीछे नहीं है फिर भी हम रोज अखबारों में टीवी चैनलों में हम महिलाओं के प्रति कुछ कुछ देख रहे हैं। वह बहुत गलत हो रहा है, कभी कोई किसी के लिए कुछ बोल रहा है तो उसका रिएक्शन गलत रहा है। हमें अपनी मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है। क्योंकि महिला का सशक्तिकरण हो चुका है परन्तु महिला के प्रति सशक्तिकरण नहीं हुआ है। महिला के प्रति सोच नहीं बदली है, महिला के प्रति मानसिकता वही है। अगर हमारे परिवार की, हमारे गांव की, हमारे समाज की प्रत्येक महिला सामाजिक तौर पे, आर्थिक रूप से मजबूत और ताकतवर बनेगी और हमारी सोच उनके प्रति अच्छी हो। अगर आपके घर परिवार की बहू, बेटी, बहन, मां, दादी सब खुश हैं तो आपका परिवार भी खुश है, समाज भी खुश है और देश भी तरक्की करेगा।
दिल्ली सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री श्री संदीप कुमार ने महिला सशक्तिकरण के लिए संयुक्त परिवार के महत्व बताते हुए कहा कि संयुक्त परिवार में परिवार के वरिष्ठ जनों से संस्कार मिलते रहते हैं। महिलाओं की की इज्जत बड़ों का मान यह संयुक्त परिवारों में बच्चे घरों से सीखते थे। अब न्यूक्लियर फैमिली में यह संस्कार भाव नहीं मिल पाते। जिस कारण महिलाओं के प्रति अपराधों के समाचार सुनने को मिलते हैं।
इस अवसर पर निष्ठा के राष्ट्रीय अध्यक्श श्री आदर्श गुप्ता, श्री जगदीश प्रकाश, श्री अशोक गुप्ता, श्री कृश्ण कुमार गुप्त, श्री राजेश गोयल के साथ बड़ी संख्या में निष्ठा के जुड़े कार्यकर्ता समाज सेवी उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें