गुरुवार, 28 जुलाई 2016

पुस्तक Compassion in 4 Dharmic Tradition’ के विमोचन

नई दिल्ली, 26 जुलाई, 2016 (Tuffer). आज प्रो. वेद प्रकाश नंदा द्वारा संकलित एवं प्रभात प्रकशन से पुस्तक Compassion in 4 Dharmic Tradition के विमोचन के अवसर पर आरएसएस के सरसंघचालक प.प. डॉ. मोहन राव भागवत जी ने कहा कि करुणा के आभाव में क्या-क्या हो रहा है. ये सब वर्त्तमान में हम सभी अनुभव कर रहें हैं, समाचार पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से पढ़ भी रहे हैं तथा न्यूज़ चैनलों के माध्यम से टीवी स्क्रीन पर देख भी रहें है. इसे बताने की आवश्यकता नहीं है. 

सोमवार, 25 जुलाई 2016

सेवा भाव समाज कार्यों के लिए आवश्यक

संवेदना, सहयोग समर्पण, तथा सेवा भाव समाज कार्यों के लिए आवश्यक - डॉ. बजरंग लाल गुप्त जी
Nistha
नई दिल्ली. महिलाओं और बच्चों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन निष्ठा के 7 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर डॉ. मुरली मनोहर जोशी, रा.स्व.संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंगलाल गुप्त तथा पंजाब केसरी की प्रबन्ध निदेशक श्रीमती किरण चोपड़ा ने निष्ठा की पुस्तकसशक्तिकरण का विमोचन किया। इस अवसर पर संगीतमय कार्यक्रम में वयोवृद्ध विख्यात गीतकार श्री संतोश आनन्द को सम्मानित किया गया। सिगनेचर ग्लोबल, जिंदल ओवरसीज तथा निष्ठा संगठन से जुड़ी अन्य उद्यम संस्थाओं के सहयोग से 23 जुलाई को आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड आपदा में निष्ठा के माध्यम से सेवा कार्यों के लिए साध्वी विचित्रा रचना, डॉ. देवप्रकाश सेमवाल को भी सम्मानित किया गया।

शिक्षा के साथ विद्या का समन्वय

शिक्षा के साथ विद्या का समन्वय लेकर चलें शिक्षक: डॉ. मोहन भागवत
शिक्षा के साथ विद्या
नई दिल्ली, 24 जुलाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सिविक सेंटर स्थिति केदारनाथ साहनी आडिटोरियम में अखिल भारतीयशिक्षा भूषणशिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा में परम्परा चलनी चाहिए, शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था के साथ विद्या और संस्कारों की परम्परा को भी साथ लेकर चलना चाहिए। सभी विद्यालय अच्छी ही शिक्षा छात्रों को देते हैं फिर भी चोरी डकैती, अपराध आदि के समाचार आज टीवी और अखबारों में देखने को मिल रहे है। तो कमी कहां है? सर्वप्रथम बच्चे मां फिर पिता बाद में अध्यापक के पास सीखते हैं।

गुरुवार, 21 जुलाई 2016

शंकराचार्य कहीन

News
हिन्दूु हिन्दूुत्व के लिए एकजुट हो - शंकराचार्य
हरिद्वार। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि हिन्दू स्वयं को जाति वर्ग में न बांट कर जाति वर्ग समाप्त करे और हिन्दूु हिन्दूुत्व के लिए एकजुट हो। गुरु पूर्णिमा का महात्म्य बताते हुए उन्होंने गुरु की स्तुति करने की सीख दी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अफसोस जताया कि हिन्दू समाज को बनिया, दलित, ब्राह्मण आदि जातियों और वर्गो में बांटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि देश में दलित नाम की कोई जाति है ही नहीं।

श्री दिलीप धारुरकर जी का लेख "भारत माता की जय"

एक लेख
शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो जिसके स्वाधीनता के सत्तर साल पश्चात् देश की जय-जयकार के सामने सवालिया निशान लगता हो। शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो जिसमें स्वाधीनता संग्राम के मंत्र स्वरूप वंदे मातरम् की घोषणा को दोहराने में लोग विरोध करते हों, हां पड़ोसी देश से बेरोकटोक आने वाले घुसपैठियों को रोकने हेतु छात्रों को आंदोलन करना पड़े, जहाँ राष्ट्रध्वज की वंदना के लिए सख्ती बरतने की चर्चा होती हो। दुर्भाग्यवश दुनिया में ऐसा एकमात्र देश अपना भारत ही बना हुआ है जहाँ यह सभी अनहोनी जैसी बातें होती है। स्वार्थ, राजनीति और वोट बैंक के लालच ने इस देश के राजनेताओं, विचारकों को इतना निचले स्तर पर ला खड़ा किया है कि देशभक्ति, देशप्रेम का सौदा करने में उन्हे जरा भी हिचकिचाहट नहीं होती है