शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

क्या समाज विभाजित करने का षड़यंत्र चल रही है?

समाज विभाजित करने का षड़यंत्र
जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय और हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय जैसे कुछ शिक्षण संस्थान राष्ट्र-विरोधियों के अड्डे बने हुए हैं। तथाकथित सेकुलरवाद, नक्सलवाद, घोर हिन्दू-विरोध आदि का इन संस्थाओं में भर-पूर पोषण होता है। इसलिये राष्ट्र को अस्थिर करने तथा भारत की छवि को धूमिल करने के देश-व्यापी षड़यंत्र के ये सूत्र-धार बने हुए हैं। वर्ष 2015 के अगस्त माह में यह योजना बनी थी कि ‘देश में असहिष्णुता और दलित-विरोध के बढ़ने का हल्ला मचाया जाये।’
इसमें लाल-ब्रिगेड की मुख्य भूमिका तय की गई और पूरे देश में उकसाने वाली हरकतें करना भी निश्चित किया गया।
तत्कालीन लक्ष्य था बिहार विधान-सभा चुनाव और बाद का लक्ष्य असम का चुनाव था। उसी षड़यंत्र के अनुसार उकसाने वाली कार्रवाइयाँ हो रही हैं। उक्त हैदराबाद के.विवि. में दिसम्बर में गोमांस-पार्टी आयोजित की गई। इसमें विवि. छात्रावास के छात्रों के एक गुट ने बड़े समारोह और दिखावे के साथ गोमांस परोसा। ध्यान रहे कि कोलकाता के मुख्य बाजारों में वाममार्गी नेता भी यह कारनामा कर चुके हैं। हैदराबाद की गोमांस-पार्टी का विरोध भी हुआ और एक गुट ने सूअर-मांस पार्टी करने की घोषणा भी की। पर बात आई-गई हो गई।

शीतकालीन अवकाश के बाद जब हैदराबाद विवि. खुला तो वाममार्गियों ने याकूब मेनन की स्मृति में समारोह मनाने की घोषणा की। वर्ष 1993 में मुम्बई में सिलसिलेवार बम-धमाके हुए थे। उनमें अरबों की सम्पत्ति स्वाहा हो गई और सैंकड़ों निर्दोषों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। याकूब मेनन को उसी नरसंहार में लिप्त होने के कारण फांसी हुई थी। ऐसे दुर्दान्त अपराधी की याद में समारोह करना क्या देश-द्रोह नहीं है? लेकिन वाममार्गियों का तो राष्ट्र-द्रोह का लम्बा इतिहास है। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय अंग्रेजों से गलबहियाँ करने, विभाजन का पूर्ण समर्थन करने और 1962 के चीनी आक्रमण को ‘मुक्ति-वाहिनी का अभियान’ बताने से लेकर कश्मीर की आजादी का समर्थन करने तक लाल-ब्रिगेड के खाते में राष्ट्र-द्रोह और राष्ट्र-द्रोह ही है। पूरी दुनिया में ये खत्म हो चुके हैं और भारत में भी अंतिम सांसें ले रहे हैं। बचे मुट्ठी भर लोग उत्पात तो मचा ही सकते हैं और मचा रहे हैं।
याकूब मेनन के स्तुति-गान का विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया तो कामरेडों ने दो-तीन कार्यकर्ताओं को धुन दिया। मार-पीट के विरोध में जब प्रदर्शन हुआ तो मार-पीट करने वालों पर कार्रवाई की गई। जिनसे पूछ-ताछ और कार्रवाई हुई उनमें पिछड़े कहे जाने वाले वर्ग के एक छात्र रोहित भी थे। बताया जा रहा है कि विवि से निलम्बन के
अवसाद में उसने आत्म-घात कर लिया। किसी भी व्यक्ति का आत्म-घात करना घोर कष्ट और चिन्ता का कारण है। पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। न्यायिक जाँच शुरु हो भी गई है पर कामरेडों का बवण्डर जारी है। वे यह वातावरण बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि हिन्दू समाज अपने पिछड़े कहे जाने वाले वर्ग का उत्पीड़क है। देखते रहिये, असम विधान सभा चुनावों तक वाममार्मियों का यह नाटक पूरे जोर-शोर से चलते रहना है।
sabhar pathey kan
VSK JAIPUR
B-19, PATHEY BHAWAN,
NEW COLONY, JAIPUR
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