मंगलवार, 8 सितंबर 2015

विहिप का केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक

विश्व हिन्दू परिषद, केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक-5 सितम्बर, 2015-कुम्भ मेला क्षेत्र,
श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा, त्र्यम्बकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)
दिनांक 5 सितम्बर, 2015 को जूना पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज की अध्यक्षता में विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल की बैठक नासिक कुंभ क्षेत्र त्र्यम्बकेश्वर में श्रीपंच दशनाम जूना अखाडा में सम्पन्न हुई जिसमें निरंजनी पीठाधीश्वर पूज्य श्री पुण्यानंद जी महाराज, ज0गु0 रामानुजाचार्य श्री कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य, ज0गु0 शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी,
मलूकपीठाधीश्वर पू0 राजेन्द्र दास जी महाराज देवाचार्य, अखाडा परिषद के अध्यक्ष पू0 नरेन्द्रानंद गिरि, महामंत्री हरिगिरि जी, जूना अखाडा के सचिव महंत नारायण गिरि जी, उदासीन बडा अखाडा के महंत दुर्गादास जी, महंत संतोष मुनि जी, महंत अग्रदास जी, आवाहन अखाडा के महंत सागरानंद जी, महानिर्वाणी अखाडा के महंत शिवनारायण पुरी जी महाराज, मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास जी, डॉ0 रामेश्वर दास श्रीवैष्णव, महंत सुरेशदास जी, महंत भगवान दास जी आदि संतों ने मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्रः समानता के संदेश के साथ अपने विचार व्यक्त किए।

बैठक में प्रथम प्रस्ताव जनगणना की रिपोर्ट की भयावहता के प्रति संतों ने एक प्रस्ताव के माध्यम से अपनी भावना को व्यक्त करते हुए  कहा कि आज इस हिन्दू समाज की जनसंख्या 80 प्रतिशत से भी नीचे हो गई है जो बड़ी चिंता का विषय है। यह चिंता केवल हिन्दू की नहीं अपितु देश की एकता और अखण्डता के प्रति आगामी संकट की आहट है। यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि इस देश के सभी वर्ग जनसंख्या नियंत्रण मंे सब प्रकार का सहयोग कर रहे हैं परन्तु मुस्लिम समाज इसमें सहयोग करने के बजाए जनसंख्या वृद्धि को एक अभियान के रूप में ले रहा है जो चिंतनीय है। घुसपैठ, धर्मान्तरण, बहुपत्नी विवाह, अधिक प्रजनन और आक्रामक नीति के आधार पर मुस्लिम समाज की जनसंख्या में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि हिन्दू की जनसंख्या वृद्धि 7.50 प्रतिशत है। इसलिए सभी राज्य सरकारों को राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनानी चाहिए।

केन्द्रीय मार्गदर्शक ने गोरक्षा के लिए केन्द्रीय कानून तत्काल बनाने पर बल देते हुए कहा कि जब तक इस देश में गो का रक्त इस देवभूमि पर एक भी बूंद गिरेगा तब तक कोई भी अनुष्ठान सफल नहीं होगा तथा सुख-शांति समाज में स्थापित नहीं हो सकती। आज देश में विकास की बहुत बडी चर्चा हो रही है जबकि गौवंश भारत के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए गौवंश की रक्षा इस देश की राष्ट्रीय आवश्यकता है। भारत सरकार को तत्काल गोवंश पर केन्द्रीय कानून बनाकर भारतीय गोवंश आधारिक जैविक खेती को प्रोत्साहन देना चाहिए। साथ ही गोवंश तस्करी रोकने की सुदृढ़ व्यवस्था बनानी चाहिए।

सामाजिक समरसता के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए संतों ने कहा कि आत्मवत् सर्वभूतेषु ही हमारा दर्शन है। इस दर्शन को ज0गु0 रामानंदाचार्य ने ‘‘जाति पाति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’’, संत तुलसीदास ने ‘‘सियराम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोगि जुर पानि’’ कहकर पोषित किया है।

इसीलिए संतों ने हिन्दू समाज का आह्वान करते हुए कहा कि सिद्धान्त और व्यवहार में एकरूपता निर्माण करते हुए समाज में व्याप्त थोपी गई सामाजिक छुआछूत, ऊंच नीच और छोटा-बडे के घृणित व्यवहार को अपने मन-मस्तिष्क से निकाल बाहर करें और समवेत स्वर में घोषणा करें कि

हिन्दवः सहोदराः सर्वे न हिन्दू पतितो भवेतः, हिन्दू हम सब एक, कोई हिन्दू अछूत नहीं है।

बैठक का संचालन श्री जीवेश्वर मिश्र ने किया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्रीपंच दशनाम जूना अखाडा के सचिव महंत नारायणगिरि जी ने कहा कि हम बडे सौभाग्यशाली हैं कि आप सभी पूज्य संत चरण हमारे अखाडे में पधारे हैं। आज यहां पर जो निर्णय लिए गए वह अपने में बहुत ऐतिहासिक हैं और समाज में बडे परिवर्तन के सूचक हैं। हम सब संतों को आज यहां लिए गए निर्णय को तन-मन-धन से सहयोग करना चाहिए। आप सबका आभार व्यक्त करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं। शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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