शनिवार, 22 अगस्त 2015

धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रशासन का हस्तक्षेप दुखद और भावनाओं को ठेंस पहुँचानेवाला : डॉ प्रवीण तोगड़िया

धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रशासन का हस्तक्षेप दुखद और भावनाओं को ठेंस पहुँचानेवाला : डॉ प्रवीण तोगड़िया 
दिल्ली, २० अगस्त, २०१५  सन्माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के संथारा पर प्रतिबन्ध लगाने के निर्णय पर दुःख और आक्रोश व्यक्त करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के आंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगड़िया ने कहा, "भारत में प्राचीन समय से समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराएँ, गतिविधियाँ, धर्म स्थान, और श्रद्धाएँ हैं।
युगों से उन्हें भारत के करोड़ों सनातनी, जैन, बौद्ध, सिख आदि अपने जीवन में संजोएँ हुए हैं। इन सभी समाजों को जब जब ऐसा लगा कि कुछ गतिविधियों, परम्पराओं में समाज के हित में कुछ परिवर्तन करना चाहिए, तब तब धार्मिक आचार्य, समाज की विद्वानगण और अन्य लोगों ने मिलकर कई परिवर्तन स्वयं ही किये हैं, जैसे कि कन्या शिक्षा, विधवा विवाह आदि।"

डॉ तोगड़िया ने आगे कहा, "परन्तु आजकल पाश्चिमात्य विचारों से प्रभावित होकर, जो जो भारतीय सनातनी, धार्मिक, सांस्कृतिक आदि हैं उन के प्रति घृणा दिखाना और उन्हें अपमानित करना यह एक फैशन हुयी है। ऐसे पाश्चिमात्य विचारों से पूर्वाग्रह दूषित होकर कोई भी प्रशासनिक प्रणाली भारत के धर्म / संस्कृति / कला , धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराएँ, धर्मस्थान आदि में इन धर्म / परंपराओं / संस्कृति / श्रद्धाओं को माननेवालें और उन का पालन करने वालें इन की भावनाओं को आहत ना करें। भारत की प्राशासनिक प्रणालियों  - सरकारें / न्यायपालिका आदि - का सम्मान करते हुए हम उन्हें विनम्र विनंती करते हैं कि भारत की धार्मिक / सांस्कृतिक परम्पराएँ और गतिविधियाँ , श्रद्धाएँ, धर्मस्थान आदि के निर्णय भारत के धार्मिक - सामाजिक आचार्यों पर, उन परंपराओं / श्रद्धाओं का पालन करनेवालें करोड़ों लोगों पर और उनमें से आएं विद्वानों / उन समाजों के प्रतिनिधियों पर ही छोड़े जाएँ और इन में से किसी में कोई भी प्राशासनिक प्रणाली हस्तक्षेप ना करें। पाश्चिमात्य या वामपंथी विचारों से धार्मिक, सांस्कृतिक बातों में किये गए प्राशासनिक हस्तक्षेप से भारत के करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएँ  आहत होती हैं।"

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