सोमवार, 31 अगस्त 2015

संस्कृत के कारण ही भारत एक है - डॉ. महेश शर्मा

नई दिल्ली. मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति, प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. परमेश्वर नारायण शास्त्री की अगुवाई में संस्कृत के चौदह संस्कृत सेवी संस्थाओं के चिंतन-सहयोग से “संस्कृत सप्ताह उत्सव” का शुभारम्भ 26 अगस्त को नई दिल्ली स्थित मावलंकर प्रेक्षागृह में में हुआ. इसमें बतौर मुख्य अतिथि श्री एस. रामदुरई, अध्यक्ष राष्ट्रीय कौशल विकास निगम दिल्ली, सारस्वत अतिथि प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद् दिल्ली तथा अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के रूप में उपस्थित रहे.

सोमवार, 24 अगस्त 2015

आगरा विश्व संवाद केन्द्र का उद्घाटन

आगरा, 23 अगस्त । आगरा प्रान्त में नये विश्व संवाद केन्द्र का उद्घाटन तय तिथि के अनुसार 22 अगस्त को संयुक्त क्षेत्र प्राचर प्रमुख )उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड) कृपाशंकर द्वारा किया गया। कृपाशंकर ने उद्घाटन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्व संवाद केन्द्र एक ऐसा केन्द्र है जहां से राष्ट्रीय विचारों का आदन-प्रदान किया जाता है।

यह कार्य संजय पैलेस के निकट स्थित पुराने विश्व संवाद केन्द्र से अब तक किया जाता था।

शनिवार, 22 अगस्त 2015

धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रशासन का हस्तक्षेप दुखद और भावनाओं को ठेंस पहुँचानेवाला : डॉ प्रवीण तोगड़िया

धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रशासन का हस्तक्षेप दुखद और भावनाओं को ठेंस पहुँचानेवाला : डॉ प्रवीण तोगड़िया 
दिल्ली, २० अगस्त, २०१५  सन्माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के संथारा पर प्रतिबन्ध लगाने के निर्णय पर दुःख और आक्रोश व्यक्त करते हुए विश्व हिन्दू परिषद के आंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगड़िया ने कहा, "भारत में प्राचीन समय से समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराएँ, गतिविधियाँ, धर्म स्थान, और श्रद्धाएँ हैं।

Suresh Chiplunkar कहीन

पढ़े  ICHR में बौद्धिक लुटेरे एक शत प्रतिशत सोचने वाली लेख।
ICHR में बौद्धिक लुटेरे
क्या आपने कभी सुना है कि सरकार ने एक पुस्तक लिखवाने के लिए चालीस लाख रूपए खर्च कर दिए हों? या फिर कभी किसी ऐसे बौद्धिक प्रोजेक्ट(?) के बारे में सुना है जो पिछले 43 वर्ष से चल रहा हो, जिस पर करोड़ों रूपए खर्च हो चुके हों और अभी भी पूरा नहीं हुआ हो?

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

डॉ. आंबेडकर को पढना आवश्यक : डॉ. मोहन राव भागवत

सामजिक विषमता मिटाने के लिये डॉ. आंबेडकर को पढना आवश्यक : डॉ. मोहन राव भागवत
नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी ने कहा कि समाज में व्याप्त जाति के आपसी भेदों के कारण पूर्व काल में हमने अपना देश  चांदी की तश्तरी में सजाकर बाहरी लोगों को सौंप दिया. इस विषमता को समाज से दूर करना है तो डॉ. आंबेडकर जी के विचारों को पढ़ना होगा, उन्हें समझना होगा. उन्हें समझे बिना, जाने बिना, पढ़े बिना पूर्णता नहीं आ पाएगी.

गुरुवार, 13 अगस्त 2015

दिग्विजय से पायें विश्व विजय की प्रेरणा

'मन के हारे हार है मन के जीते जीत’ ये कहावत जितनी व्यक्ति पर लागू होती है, उतनी ही समाज पर भी लागू होती है। विजय की आकांक्षा व विजय की अनुभूति समाजमन को बल देते है। जब समूचा राष्ट्र ही अपनी शक्तियों को भूलने के कारण आत्मग्लानि से ग्रस्त हो जाता है तब कोई अद्वितीय विजय ही उसे इस मानसिक लकवे से बाहर ला सकती हैं।

संस्कृतभारती से समाचार

नमस्ते!
२३ अगस्त, २०१५ दिन रविवार को धरती की सबसे शुद्ध और वैज्ञानिक संस्कृत भाषा को देश के लाखों घरों तक पहुँचाने के लिये अब तक का सबसे बड़ा देशव्यापी अभियान
'गृहं गृहं प्रति संस्कृतम्' आयोजित हो रहा है।
जिसमें लाखों कार्यकर्ता , शिक्षक और छात्र एक दिन का पूर्ण समय  संस्कृत के लिए समर्पित करेंगे।

अपने-अपने घरों से निकलकर प्रातः ८ बजे से सायं ७ बजे तक पूरे दिन अपनी गली, मोहल्ले और बस्ती के अधिकतम घरों में संस्कृत का प्रसार करेंगे और व्यावहारिक संस्कृत शब्दों  जैसे - नमस्ते,  हरिओम, मम नाम, स्वागतम्, धन्यवाद: आदि का प्रयोग करेंगे। संपर्क करने वाले को संस्कृत की जितनी जानकारी हो उतनी उसे सम्पर्कित घर में बोलनी है। सम्पर्क के समय "वदतु संस्कृतम्" पुस्तक सशुल्क ( सहयोग राशि 5 ₹/. ) और प्रचार पत्रक का वितरण भी होगा।

आप संस्कृत के अनन्य अनुरागी हैं। इसलिये यदि आप भी इस महाभियान में सम्मिलित होंगे तो यह अभियान अधिक व्यापी होगा। अत: आप अपने वसति के वसति प्रमुख का दायित्व निर्वहन करें यह निवेदन है। अभियान के लिए ३- ४ लोगों के सम्पर्क गण की रचना भी करें।

आप वाट्सएप पर अपने परिचितों को सन्देश भेजकर या दूरवाणी पर बातकर उन्हे अभियान में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। आपका तन-मन-धन तीनों देवभाषा के पुनीत कार्य में आवश्यक है।

।।लसतु संस्कृतं चिरं गृहे गृहे च पुनरपि।।

संस्कृतभारती

रविवार, 9 अगस्त 2015

जल, जीवन और गंगा - एक आलेख

साल 2हज़ार से प्रतिवर्ष एक बार टेम्स के किनारों पर रहने वाले ब्रिटिश टेम्स नदी की सफाई के लिए जुटते हैं।सफाई के लिए जरूरी सारे साधन आम लोग स्वयं ही लेकर आते हैं। ऐसी इच्छाशक्ति भारत में संभव नहीं है क्या ? कुंभ के लिए बिना न्यौते के करोड़ों लोग पहुँच सकते हैं। मौनी अमावस्या , नरक चौदस , गंगा दशहरा ,ग्रहण आदि के समय करोड़ों लोग नदियों में डुबकी लगाने पहुँच सकते हैं तो यदि इस आस्था को आधार बनाकर जान जागरण किया जाए तो करोड़ों हाथ नदियों की स्वच्छता के लिए क्यों नहीं बढ़ सकते ?

सोमवार, 3 अगस्त 2015

लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल कहीन

विकास की बदलती अवधारणा पर्यावरण को कर रही दूषित: लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल 
देेहरादून । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यवाह लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल ने विवेकानंद शाखा के स्वयंसेवकों के साथ आज श्री रवि मित्तल मेमोरियल पब्लिक ऐकेडमी के परिसर में पौध रोपण किया। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों को पर्यावरण की महत्ता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व में पर्यावरण पर संकट है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जो प्राकृतिक प्रदत्त चीजे जैसे वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी, वनस्पति, आदि ये सब दूषित हो रही है।