सोमवार, 20 जुलाई 2015

शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण होना चाहिए

 – अतुल कोठारी
अतुल कोठारी
स्वतंत्रता पश्चात हमें शिक्षा क्षेत्र में किस दिशा में बढ़ना था और हम किस तरफ चल पड़े, हमारी वर्तमान शिक्षा नीति जीवन के मूल उद्देश्यों को पूरा कर पा रही है अथवा नहीं, मातृभाषा केवल भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देने के पीछे वैज्ञानिक कारण विद्यमान हैं, भाषा न केवल ज्ञानार्जन का माध्यम है, अपितु संस्कार व संस्कृति के प्रसार का माध्यम भी है,  विदेशी भाषा में शिक्षा के प्रभाव,

राष्ट्रीयता की रक्षा, समरसता के बंधन से !

 - प्रमोद बापट
अपने हिंदू समाज के व्यक्तिगत तथा पारिवारिक जीवन में रीति, प्रथा तथा परंपरा से चलती आयी पद्धतियों का एक विशेष महत्व है. अपने देश की भौगोलिक विशालता तथा भाषाई विविधता होते हुए भी समूचे देश में विविध पर्व, त्यौहार, उत्सव आदि सभी सामुहिक रीति से मनाये जाने वाले उपक्रमों में समान सांस्कृतिक भाव अनुभव किया जाता है. इसी समान अनुभव को 'हिंदुत्व' नाम दिया जा सकता है. कारण 'हिंदुत्व' यह किसी उपासना पद्धति का नाम नही है. सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसी कारण 'हिंदुत्व' को एक जीवनशैली बताया है.

शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

सच्चे कर्म-योगी संत थे मा सोहन सिंह जी

- विनोद बंसल
मो 9810949109
अणु डाक : vinodbansal01@gmail.com

विनोद बंसल
आज के जमाने में यह बात बडी काल्पनिक सी लगती है कि जब कोई कहे कि एक व्यक्ति जिसने अपने जीवन के 92 वर्ष देश को समर्पित कर दिए और आजीवन न शादी की, न अपना घर बनाया, न ग़ाडी, न पैसा जोडा, न कोई बैंक खाता खोला किन्तु अनेक विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए भी देश भक्तों की एक बडी फ़ौज तैयार कर दी। गत चार जुलाई को उनके निधन के बाद ज्ञात हुआ कि उनकी व्यक्तिगत भौतिक पूंजी के नाम पर उनके कक्ष से मिला सिर्फ़ एक थैला और उसमें रखे दो जोडी पहनने के वस्त्र। 1943 से लगातार 72 वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में देश भर में भ्रमण कर जन-जन के हृदय में पैठ बिठाने वाले श्री सोहन सिंह जी के बारे में कुछ विस्तृत जानने की उत्कंठावश, उनके निधन का समाचार पाते ही, जब पांच जुलाई को सुबह मैंने गूगल किया तो हत् प्रभ रह गया।

रविवार, 12 जुलाई 2015

शाखा पर सीपीआई (एम) विधायक के नेतृव में हमला, दो विस्तारकों को जबरन ले गए

त्रिपुरा : नलचर किलामुरा एसबी स्कूल के मैदान में लगने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा पर सीपीआई (एम) विधायक के नेतृत्व में कुछ असामाजिक तत्वों ने 06 जुलाई को सुबह हमला कर दिया. शाखा पर उपस्थित स्वयंसवेकों के साथ गाली गलौच व मारपीट की. इतना ही नहीं शाखा के दौरान उपस्थित दो विस्तारकों को जबरन बंधक बनाकर अपने साथ ले गए, विस्तारकों को डराया-धमकाया गया. दोनों को कुछ घंटों के पश्चात पुलिस की मदद से छुड़वाया गया.
नलचर किलामुरा एसबी स्कूल के मैदान में लगने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा पर सीपीआई (एम) विधायक के नेतृत्व में कुछ असामाजिक तत्वों ने 06 जुलाई को सुबह हमला कर दिया. शाखा पर उपस्थित स्वयंसवेकों के साथ गाली गलौच व मारपीट की. इतना ही नहीं शाखा के दौरान उपस्थित दो विस्तारकों को जबरन बंधक बनाकर अपने साथ ले गए, विस्तारकों को डराया-धमकाया गया. दोनों को कुछ घंटों के पश्चात पुलिस की मदद से छुड़वाया गया.

शनिवार, 11 जुलाई 2015

भारत : शिक्षण मंडल ने विकसित की भावी शिक्षा की रूपरेखा

 नई दिल्ली. भारत में 4000 से अधिक शिक्षाविदों के विचारों को संकलित कर भारतीय शिक्षण मंडल ने एक समग्र एवं एकात्म शिक्षा के प्रारूप ‘‘भारतीय शिक्षण रूपरेखा का निर्माण किया. वर्तमान में इस पर राष्ट्रव्यापी अभिमत संग्रह अभियान चल रहा है. यह जानकारी भारतीय शिक्षण मंडल के सह संगठन मंत्री श्री मुकुल कानितकर ने पत्रकारों के सम्मुख प्रेस वार्ता में रखी. प्रेस वार्ता में उनके साथ मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मोहन लाल छीपा व उपाध्यक्ष डॉ. बी.एल. नाटीया व सांसद मनोज तिवारी उपस्थित थे.

जनसंख्या नियंत्रण से अधिक जन-विकास आवश्यक : विहिप

विश्व जनसंख्या दिवस पर किया जन-विकास यज्ञ

नई दिल्ली। जुलाई 11, 2015।  विश्व जनसंख्या दिवस पर आज विश्व हिन्दू परिषद की प्रेरणा से जन विकास यज्ञ का आयोजन कर “कृणवन्तो विश्वमार्यम” यानि विश्व को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लिया गया। यज्ञोपरान्त सम्बोधित करते हुए विहिप प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने कहा कि जनसंख्या दिवस पर आज चारों ओर जनसंख्या नियंत्रण की बात तो हो रही है किन्तु असली जन-विकास का मुद्दा कहीं न कहीं गौण होता जा रहा है।

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति की बैठक

विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबंध समिति की बैठक  दिनांक 27, 28 जून, 2015 को भीलवाड़ा राजस्थान में सम्पन्न हुई। भारत में स्वेत क्रांति और जमीन, जंगल, जल, कृषि, ग्राम और किसान इन सबको एक साथ विकास के लिए गोवंश की आवश्यकता सभी पदाधिकारियों ने अनुभव की। इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया। विहिप के महामंत्री चंपतराय जी ने बैठक में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. उन्होंने जनवरी से जून 2015 तक के कार्य का प्रतिवेदन रखा