मंगलवार, 5 मई 2015

नेपाल में महाभूकम्प : सदमे में देश

हिन्दू स्वयंसेवक संघ नेपाल, जनकल्याण प्रतिष्ठान , प्राज्ञिक विद्यार्थी परिषद् नेपाल, विश्व हिन्दू परिषद् नेपाल , पशुपति शिक्षा प्रसार समिति नेपाल , जनजाति कल्याण आश्रम सहित अन्य संगठनों द्वारा भूकम्प राहत अभियान संचालन किया गया है। इस अभियान  के अन्तर्गत 1000 उद्धार और राहत कार्यों में अहोरात्र कट रहे हैं। इन स्वयंसेवकों ने अपना व्यक्तिगत जीवन  में खतरा मोल लेते हुए भी उन स्थानों पर पहुँच रहे हैं जहाँ भूकम्प से आहत जन साधारणों तक राहत कार्य नहीं पहुँच पाया था।

25 अप्रैल को नेपाली समय अनुसार दिन के 11:56 पर आये भीषण भूकम्प के ठीक 3 घण्टे बाद संघ के स्वयंसेवक सक्रिय हो गए। काठमाण्डू के शान्तिनगर अनामनगर, गौशाला, कालिकास्थान सहित देश के विभिन्न स्थानों पर संघ के स्वयंसेवकों ने     तात्कालिक राहत के रूप में चिउडा, दालमोठ, पीने का पानी लगायत के खाद्य सामग्री और प्लास्टिक टेन्ट आदि वितरण किया। अभी काठमाण्डू, भक्तपुर, धादिङ, काभ्रे, ललितपुर, नुवाकोट, रसुवा, रामेछाप, सिन्धुपालचोक लगायत के पहाडी जिले में स्वयंसेवक राहत सामग्री लेकर पहुँच चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह मा. दत्तात्रेय होसबाले स्वयं धादिङ और भक्तपुर जिले में पहुँचकर भूकम्प पीडितों को कम्बल, त्रिपाल सहित खाद्य सामग्री वितरण किया। यह देख स्थानीय लोग भावविभोर हो गये कि सरकार से पहले संघ के अधिकारी के द्वारा राहत सामग्री लेक उन स्थानों पर पहुँचे।
25 अप्रैल शाम से ही हिन्दू स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय केशव धाम काठमाण्डू में सहायता केन्द्र स्थापित कर भूकम्प अभियान को संचालन किया जा रहा है। भूकम्प से प्रभावित दुनियाभर के लोगों ने संघ कार्यालय द्वारा स्थापित हैल्प लाइन नम्बरों पर सम्पर्क कर काठमाण्डू सहित देश के विभिन्न स्थानों पर तीर्थाटन, ट्रैकिंग और पर्यटन के तौर पर नेपाल घू मने आए अपने परिजनों के साथ सम्पर्क कराने का आग्रह और खोजबी कर सूचना देने का आग्रह भी किया। उन सभी सम्पर्क कर्ताओं की सूची बनाकर नेपाल की सरकारी उद्धार टीम और भारत सरकार की उद्धार टीम से सम्पर्क कर भूकम्प में फसें लोगों के बारे में सूचना प्रेषित की गई  जिसके कारण 6 हजार से अधिक लोगों को उद्धार कराने में सफलता प्राप्त  हुई काठमाण्डू सहित देश के विभिन्न स्थानों में फसें 10 हजार से अधिक लोगों को संघ के कार्यकर्ताओं ने उद्धार करवाकर उनके अपने - अपने स्थानों पर सुरक्षित पहुँचाया गया। इतना ही नहीं, भूकम्प में फसकर मृत हुए 100 शवों के बारे में जानकारी हासिल कर उनके परिजनों को सौंपा गया।
काठमाण्डू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय टीचिङ अस्पताल, वीर अस्पताल, ट्रमा सेन्टर, सिविल अस्पताल सरिखे अस्पतालों में मृत रीरों की कतार लग गई। मृतकों की पहचान की जा रही है। संघ के कार्यकर्ताओं की एक टोली इस अस्पताल में कार्यरत है। भूकम्प के चलते मृत हुए शवों को उठाना, कैमीकल लगाने में डाक्टरों की सहायता, शवों को ट्रान्सपोर्ट हेतु थैलियों में सम्मानपूर्वक रखना तथा फिर गाडियों में रखना आदि कार्य संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है। साथ में घायल लोगों के अस्पताल प्रवेश से लेकर डाक्टरी जाँच में ले जाने, दवाएँ उपलब्ध कराने में सहायता का कार्य लगातार चल रहा है। दो दल बनाए गए हैं, एक बीमारों तथा उनके परिजनों की सहायता तथा दूसरा दल मृत लोगों की व्यवस्था में लगा है।
सी प्रकार संघ के कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों की पचास टोली बनाकर विभिन्न अस्पताल, राहत शिविरों और आपद्ग्रस्त जिलों में भेजी जा रही है।
30 अप्रैल अर्थात भूकम्प के पाँचवे दिन संघ के द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों के बारे में प्रेस वार्ता हिन्दू स्वयंसेवक संघ नेपाल के प्रचार विभाग द्वारा संघ के केन्द्रीय कार्यालय केशव धाम में आयोजित की गई। इस प्रेस वार्ता में संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यो का विवरण, 25 अप्रैल से लेकर अब तक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा आपदाग्रस्त लोगों के उद्धार में किये गये उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा की गई । इस प्रेस वार्ता को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह मा. दत्तात्रेय होसबाले ने सम्बोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित दुनियाभर में हिन्दू स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा नेपाल के इस आपद्स्थित में भेजे जा रहे सहयोग के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की । उन्होंने सबसे पहले मलवे के अन्दर दबे जीवित लोगों का उद्धार कराने के लिए उद्धार टीमों से सम्पर्क कर अधिक से अधिक लोगों को बचाया जाये इसके लिए तत्परतापूर्वक स्वयंसेवकों द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसको और तीव्र बनाने के लिए आगे बढ्ने को कहा। उन्होंने घरबार विहिन लोगों के समक्ष पहुँचकर उनको बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराये जा रहे कार्यों के बारे मे भी विस्तारपूर्वक चर्चा की । भविष्य में घरबार विहिन लोगों के लिये  निवासस्थान की सुविधा मुहैया कराने के लिये प्रयासरत रहने का विचार प्रकट किया।
नेपाल में अभी तक इस महाभूकम्प में फसकर 6000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है और इसकी तादात 15000 से अधिक भी पहुँचने का सम्भावना व्यक्त की जा रही है। घायलों की संख्या 8000 पार हो चुकी है। घायलों की संख्या भी 20000 के पार हो सकती है। जनधन एवं पशुधन सहित सम्पूर्ण क्षति का आंकलन अभी तक सरकार के द्वारा घोषित नहीं किया गया है लेकिन अनुमान है कि यह 10 खरब  से ज्यादा होने का प्रारम्भिक अनुमान किया जा रहा  है।
काठमाण्डू सहित देश के विभिन्न भागों में पुरातात्विक महत्व के कई मठ-मन्दिरएवं इमारतें ध्वस्त हो चुकी है। जिसमें पाटन कृष्ण मन्दिर दरबार स्क्वायरवसन्तपुर हनुमान ढोका दरबार स्क्वायर भक्तपुर दरबार स्क्वायर तलेजु मन्दिर ध्वस्त हो चुके है। पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व का भीमसेन धरहरा के नाम से प्रसिद्ध नौतले धरहरा भी पूर्णतः ध्वस्त हो चुका है। 5000 वर्ष पुराने पौराणिक ऐतिहासिकधार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की मूर्तीयों के बारे में भी लोगों में चिन्ता का वातावरण व्याप्त है कि इनका प्रतिस्थापन और सुरक्षा किस प्रकार हो पाएगी। इस महाभूकम्प की चपेट में नेपाल के 32 जिले प्रभावित हुए है। सिन्धुपालचोक रामेछाप धादिङ रसुवा नुवाकोट काभ्रे लमजुङ गोरखा भक्तपुर ललितपुर काठमाण्डू दोलखा सरिखे 12 जिले मुख्य रूप से प्रभावित है। इसमें से सिन्धुपालचोक रामेछाप धादिङ रसुवा भक्तपुर गोरखा लमजुङ ऐसे जिले है जिसके 90% गाँव पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुके हैं। ये ऐसे गाँव है जहाँ भूकम्प के तीन दिनों तक कोई  पहुँच ही नहीं पाया। क्यूकी सारे रास्ते क्षतिग्रस्त हो चुके थे। हेलिकाप्टर से पहुँचना एकमात्र विकल्प बचा था। हेलिकाप्टर के माध्यम से किसी प्रकार लोगों तक भोजन पहुँचाया गया। और उद्धार कार्य भी चलाया गया। काठमाण्डू सहित आपदाग्रस्त जिले अभी भी सुनसान है। लोग महामारी के डर से राजधानी काठमाण्डू सहित उन जिलों से भी तराई की तरफ पलायन कर रहें है। कब तक लोग पुनः अपने काम में लौट पायेंगे यह कह पाना कठीन है फिर भी अभि पन्द्रह दिन लगेंगे जिन्दगी पटरी पर लौटने में।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें