बुधवार, 18 मार्च 2015

आर एस एस का २०१५ वार्षिक प्रतिवेदन हिंदी मे

पढे आर एस एस, सरकार्यवाह  द्वारा प्रस्तुत आर एस एस का २०१५ वार्षिक प्रतिवेदन हिंदी मे|
माननीय सरकार्यवाह जी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा १३ मार्च २०१५
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा
१३ मार्च २०१५
परमपूजनीय सरसंघचालक जी, अखिल भारतीय पदाधिकारी गण, अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सभी सदस्यगण, क्षेत्रों एवम् प्रान्तों के मान्यवर संघचालक तथा कार्यवाह बंधुगण, नवनिर्वाचित अखिल भारतीय प्रतिनिधि बंधु तथा सामाजिक जीवन के विविध कार्यों में कार्यरत निमंत्रित बहनों तथा भाइयों का नागपुर के इस पावन परिसर में संपन्न हो रही अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में हृदय से स्वागत है। संभव है कि आप में से कुछ बंधुओं का इस सभा में सम्मिलित होने का यह पहला ही अवसर होगा। 


श्रद्धांजलि:-
वर्षों तक जिनका सान्निध्य तथा मार्गदर्शन हमें प्राप्त होता रहा तथा सामाजिक, राजनीतिक, जन प्रबोधन एवं जन जागरण के क्षेत्र में अपने सामर्थ्य से जिन्होंने जन-जन में अपना स्थान बनाया था, ऐसे कुछ महानुभाव विगत कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद हमसे बिछुड़ गये हैं। उनका स्मरण होना स्वाभाविक है। 

संघ समर्पित और स्वयंसेवकों के लिए जिनका जीवन आदर्श रहा ऐसे दक्षिण मध्य क्षेत्र के मा. संघचालक श्री टी. व्ही. देशमुख जी कर्क रोग से संघर्ष करते-करते हमें छोड़ कर चले गये। गुजरात में जिनका प्रदीर्घ प्रचारक जीवन रहा ऐसे श्री जीतुभाई संघवी अकस्मात अपनी जीवनयात्रा समाप्त कर गये। वनवासी कल्याण आश्रम में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने वाले विशेषतः पूर्व एवं उत्तर पूर्व क्षेत्रों में कार्य को सशक्त आधार प्रदान करने वाले डॉ. रामगोपाल जी कर्क रोग से जूझते हुए स्वर्गलोक की यात्रा पर गमन कर गये। बिहार प्रांत में संघ कार्य के विस्तार में जिनकी अहम् भूमिका रही एवं पश्चात् पूर्व सैनिक सेवा परिषद के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री रहे ऐसे श्री नरेन्द्रसिंह जी आज हमारे मध्य नहीं है। जयपुर महानगर में दायित्व निर्वहन करने वाले प्रचारक श्री तरुणकुमार जी रेल दुर्घटना में स्वर्गगमन कर गये। कर्नाटक प्रांत से प्रचारक जीवन का प्रारंभ करने वाले एवं विश्व हिंदु परिषद् में विभिन्न दायित्वों को निभाने वाले वरिष्ठ प्रचारक श्री श्रीधर आचार्य भी हमारे बीच अब नहीं रहे।  

कोलकाता के माननीय संघचालक श्री विश्वनाथ जी मुखर्जी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमान यतींद्र जी तिवारी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के भूतपूर्व महामंत्री तथा तेलगु साहित्य और पत्रकारिता क्षेत्र में जाने माने भाग्यनगर के श्री पी. व्यंकटेश्वरलु, पद्मविभूषण से सम्मानित इसरो के भूतपूर्व प्रमुख, स्वनामधन्य श्री बसंतराव गोवारीकर जी, बड़ोदरा के राजपरिवार की सदस्या श्रीमती मृणालिनीदेवी, यह सभी महानुभाव परलोक की यात्रा पर प्रस्थान कर गये। 

चित्रपट सृष्टि के जाने-माने कलाकार मुंबई के श्री सदाशिव अमरापुरकर, महाभारत धारावाहिका के दिग्दर्शक श्री रवी चैपड़ा जी, हास्य अभिनेता श्री देवेन वर्मा, सिने जगत के ही गुजरात के श्री उपेन्द्र त्रिवेदी जी और भाग्यनगर के ‘चक्री’ उपनाम से प्रख्यात श्री जी. चक्रधर जी, इन्हें हम पुनः कभी देख नहीं पायेंगे। 

व्यंगचित्र के क्षेत्र में प्रतिभा संपन्न, वर्षों तक ‘‘सामान्य मनुष्य’’ के रुप में हमारी स्मृति में रहेंगे ऐसे श्री आर. के. लक्ष्मण जी, न्याय के क्षेत्र में जिनकी प्रतिबद्धता और प्रखरता से सारा देश परिचित रहा ऐसे न्यायमूर्ति श्री वी. आर. कृष्ण अय्यर जी, प्रख्यात स्तंभलेखक एवं कार्टूनिस्ट दिल्ली के श्री राजींदर पुरी, जाने माने पत्रकार तथा पायोनिअर एवं आऊटलुक के संस्थापक संपादक श्री विनोद जी मेहता तथा योजना आयोग के सदस्य के नाते रहे ऐसे श्री रजनी कोठारी जी की अनुपस्थिति सदा ही वेदना देती रहेंगी।  

मेघालय के स्वधर्म जागरण संगठन ‘सेंगखासी’ में जिनकी प्रभावी भूमिका रही ऐसे एम्. एफ. ब्लो. (M. F. Blow), वैसे ही मेघालय के ही ‘पनार’ जनजाति में ‘‘दोलोय’’ (धार्मिक एवं प्रशासनिक प्रमुख) थे ऐसे श्री के. सी. रिम्बाय (K. C. Rymbai) जो ‘स्वधर्म’ पालन का विचार दृढ़ता के साथ रखते थे ऐसे दोनों महानुभाव अंतिम यात्रा पर प्रस्थान कर गये। 

बंग्लादेश में जिनका वास्तव्य रहा और हिन्दु समाज जिनके मार्गदर्शन से लाभान्वित होता रहा ऐसे पू. महामण्डलेश्वर स्वामी प्रियव्रत ब्रम्हचारी जी तथा तेवक्केमठम् के पूज्य मठाधिपति शंकरानंद ब्रम्हानंदभूति मूप्पिल स्वामीयार जी का पार्थिव शरीर शांत हो गया। 

गोरखाभूमि हेतु आंदोलन का नेतृत्व करने वाले बंगाल के श्री सुभाष घीसिंग, मुंबई से सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री रहे श्री मुरली देवरा जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे श्री अब्दुल रहमान अंतुले जी, महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री, युवा नेता श्री आर. आर. पाटील जी, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री मास्टर हुकुमसिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापककेरल के श्री एम्. पी. राघवन् तथा साम्यवादी विचारों के प्रखर पुरस्कर्ता श्री गोविंद पानसरे जी राजनीतिक क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निर्वहन करते हुए काल प्रवाह में ओझल हो गये। 

विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में एवं आतंकवादियों के हाथों अपने प्राण गंवाने वाले सामान्य-जन तथा देश की सुरक्षा हेतु अपना जीवन समर्पित करने वाले सेना तथा सुरक्षाबलों के वीर जवान आदि सभी को हम इस अवसर पर स्मरण करते हैं। 

इन सभी दिवंगत बंधु-भगिनियों के परिवार जनों के प्रति अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा अपनी शोक संवेदना प्रकट करती है तथा इन दिवंगत आत्माओं को हम श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।  

कार्यस्थिति:-
2012 में नागपुर में संपन्न अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में हमने कार्य विस्तार पर चिंतन करते हुए निश्चित योजना पर कार्य करना प्रारंभ किया था। तीन वर्षों के सतत प्रयासों के संतोषजनक परिणाम सामने आये हैं। 2012 की तुलना में वर्तमान में 5161 स्थान और 10413 शाखाओं की वृद्धि हुई है। वैसे ही साप्ताहिक मिलन और संघ मंडली की संख्या में भी वृद्धि हुई है। संकलित वृत्त के अनुसार इस समय 33222 स्थानों पर 51330 शाखाएँ, 12847 साप्ताहिक मिलन और 9008 संघ मंडली हैं। इसमें तरुण विद्यार्थिओं की 6077 शाखाएँ है। कुल मिलाकर 55,010 स्थानों तक हम पहुँच गए हैं।  

गत मार्च के पश्चात संपन्न संघ शिक्षा वर्गों में प्रथम वर्ष सामान्य एवं विशेष के 59 वर्गों में 9609 स्थानों से 15332 शिक्षार्थी, द्वितीय वर्ष सामान्य एवं विशेष के 16 वर्गों में 2902 स्थानों से 3531 शिक्षार्थी सहभागी हुए। तृतीय वर्ष के वर्ग में 657 स्थानों से 709 संख्या रही। इसी कालखंड में विभिन्न प्रान्तों में संपन्न प्राथमिक वर्गों में भी ग्रामों का प्रतिनिधित्व एवं शिक्षार्थियों की संख्या भी अच्छी रही है। कुल मिलाकर 23812 शाखाओं से 80409 संख्या रही।  

परम पूजनीय सरसंघचालक जी का 2014-15 का प्रवास:-
क्षेत्रश: प्रवास में संगठनात्मक बैठकों के साथ-साथ विशेष कार्यक्रमों में उपस्थिति और विशेष संपर्क की योजना बनी थी। देवगिरी प्रान्त का विशाल एकत्रीकरण और इम्फाल में संपन्न शीत सम्मेलन, दोनों ही कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं का सघन प्रयास और समाज का सहभाग अत्यंत प्रेरक रहा। ब्रज एवं उत्तराखंड के महाविद्यालयीन छात्र शिविर, नियोजन और उपस्थिति की दृष्टि से प्रभावी रहे। 

कुछ स्थानों पर आयोजित वार्तालाप कार्यक्रमों में प्रसार माध्यमों के प्रमुख व्यक्ति, शिक्षाविद्, न्यायाधीश, शासकीय अधिकारी, संत, साहित्यकार आदि महानुभावों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। 

विशेष संपर्क के क्रम में मंगलयान योजना के प्रमुख श्री मन्नादुरै, नोबल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी, आचार्य महाश्रमण जी, भंते राहुलबोधि जी, स्वामी दयानंद सरस्वती जी, पुरी के महाराजा श्री गजपती जी आदि महानुभावों से मिलना हुआ।  

मा. सरकार्यवाह जी का प्रवास:- वर्ष 2014-15 की प्रवास योजना में अन्यान्य संगठनात्मक बैठकों के साथ ही एक विशेष बैठक का आयोजन सभी स्थानों पर किया गया। कार्य विस्तार के नाते अधिकाधिक ग्रामों तक कार्य खड़ा हो इस दृष्टि से जिले के मुख्य मार्ग पर आने वाले ग्रामों तक संपर्क करने की योजना बनाई गयी। ऐसे सभी ग्रामों से चयनित व्यक्तियों को निमंत्रित किया गया। 

प्रवास के दौरान 11 क्षेत्रों में ऐसी 15 बैठकों का आयोजन किया गया जिसमें 34 जिलों के 1522 ग्रामों से 2919 लोग उपस्थित रहे। सभी बैठकों में आगामी कालखंड में कैसी रचना हो इस पर विचार हुआ। बैठकों में नए संपर्क में आए व्यक्तियों का प्रतिशत लगभग 40 रहा। अनुकूल वातावरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। समग्रता से नियोजन होगा तो अच्छे परिणाम आऐंगे।  

कुछ क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों के प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठकें हुई। विशेषतः धर्मजागरण समन्वय विभाग का कार्य सुनियोजित पद्धति से बढ़ रहा है ऐसा कह सकते हैं।  

कार्यकर्ता विकास वर्ग:- कार्यकर्ताओं की क्षमता विकास की दृष्टि से ‘‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’’ का विचार किया गया है। जिला-विभाग स्तर का दायित्व निर्वहन करने वाले अधिक सक्षम हों यह विचार करते हुए पाठ्यक्रम तैयार किया गया। यह वर्ग क्षेत्रश: हो रहे हैं। वर्ष 2014-15 में मध्य-क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों के वर्ग संपन्न हुए। अनुभव अच्छा रहा। प्रतिवर्ष क्षेत्रश: वर्ग होने वाले हैं।  

कार्य विभाग वृत्त:-
(1) शारीरिक विभाग:- गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रहार महायज्ञ में सभी बिंदुओं में - जैसे सहभागी शाखाएँ, स्वयंसेवक, कुल प्रहार, 1,000 से अधिक प्रहार लगाने वालों की संख्या आदि - अच्छी वृद्धि हुई है। पचास प्रतिशत से अधिक शाखाओं के 3 लाख 27 हजार स्वयंसेवकों का सहभाग जिसमें 90 प्रतिशत स्वयंसेवक 45 वर्ष से कम आयु के थे। कुल 15 करोड़ 80 लाख प्रहार लगाये गये जो इस कार्यक्रम की उल्लेखनीय विशेषताएँ हैं। 

इस वर्ष उज्जैन में बालों के लिए मलखंब का विशेष प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया गया जिसमें 26 प्रातों से 54 बाल एवं किशोर स्वयंसेवक सहभागी हुए। 

घोष प्रमुखों की बैठक में 34 प्रांतों का प्रतिनिधित्व रहा। आसन-योग विषय का वर्ग भी संपन्न हुआ जिसमें 38 प्रांतों से 101 स्वयंसेवक सम्मिलित हुए।  

(2) बौध्दिक विभाग:- इस वर्ष बौद्धिक विभाग द्वारा भोपाल में एक विशेष ‘अखिल भारतीय बौद्धिक अभ्यास वर्ग’ का आयोजन हुआ। इस वर्ग में (1) हिन्दुत्व - हिन्दु-राष्ट्र, (2) सामाजिक समरसता, (3) विकास की अवधारणा, (4) जैन, बौद्ध, सिक्ख धर्मों का सार, (5) मातृशक्ति इन पाँच विषयों की प्रमुख अधिकारियों द्वारा प्रस्तुति के बाद गटश: गहन चर्चा की गई। परम पूजनीय सरसंघचालक जी द्वारा प्रश्नोत्तर व मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस वर्ग में कुल 194 उपस्थिति रही।
इस वर्ष सभी शाखाओं में राष्ट्रीय, स्वयंसेवक, संघ इन तीन शब्दों पर व्यापक रूप से चर्चा की गई। परम पूजनीय डॉक्टर जी के जीवन पर दो बौद्धिक वर्गों की योजना भी सभी शाखाओं के लिये की गई थी। लगभग सभी प्रान्तों में इस विषय पर बौद्धिक देने वाले वक्ताओं की तैयारी के लिये कार्यकर्ताओं की कार्यशालाएँ भी आयोजित की गईं।  

(3) प्रचार विभाग:- नारद जयंती के उपलक्ष्य में पत्रकार सम्मान तथा प्रबोधन के वार्षिक कार्यक्रमों की शृंखला में 118 स्थानों पर कार्यक्रम संपन्न हुए जिसमें 3,401 पत्रकार एवम् अन्य नागरिक उपस्थित रहे। कुल मिलाकर 355 स्तंभ लेखक संपर्क में आये हैं। कम्युनिटी रेडिओ चलाना एवं दूरदर्शन पर पैनल चर्चा के प्रशिक्षण वर्ग भी संपन्न हुए। परिणामस्वरुप 217 कार्यकर्ता विविध भाषाओं के 68 टेलिव्हिजन केद्रों पर आयोजित चर्चा सत्रों में नियमित जाने लगे हैं। पुणे और कोलकाता में पत्रकारों के लिए ‘संघ परिचय वर्ग’ का विशेष उपक्रम का आयोजन हुआ। इन वर्गों में महिला पत्रकारों समेत अच्छी संख्या में पत्रकारों ने सहभागी होकर संघ के बारे में जानने का प्रयास किया। जागरण पत्रिका के माध्यम से 2 लाख 27 हजार ग्रामों से संपर्क स्थापित हुआ है। इस वर्ष देशभर में प्रमुख 912 स्थानों पर 12,652 स्वयंसेवकों द्वारा साहित्य बिक्री के कार्यक्रम आयोजित किये गये।  

प्रान्तों में संपन्न विशेष कार्यक्रम:-
1. ऐतिहासिक पथसंचलन - तमिलनाडु:- इस वर्ष राजा राजेंद्र चोल के सिंहासनारोहण को 1000 वर्ष पूर्ण हुए। इस निमित्त विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन स्थान-स्थान पर हो रहा था। तमिलनाडु के कार्यकर्ताओं ने 9 नवंबर 2014 को सभी जिला केन्द्रों में पथसंचलन निकालने की योजना बनाई। राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने अनुमति देने से इंकार कर दिया। मामला न्यायालय में पहुँचा। न्यायालय ने संघ के पक्ष में निर्णय देते हुए पथसंचलन पर रोक लगाना ठीक नहीं ऐसा कहा, परंतु प्रशासन का दुराग्रह बना रहा। संघ ने न्यायालयीन निर्णय एवं अपनी योजना के अनुसार संचलन निकाले। सभी जिला केन्द्रों में संचलन में नागरिक, महिला एवं पुरुष भी सम्मिलित हुए। 35,000 बंधु-भगिनियों की गिरफ्तारियाँ हुई। एक अभूतपूर्व शक्ति का दर्शन हुआ है। 

विधि सम्मत ढंग से कार्य करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ब्रिटिशकाल के किसी कानून की धारा के अंतर्गत गणवेश में संचलन करने की अनुमति न देना तमिलनाडु सरकार की तानाशाही का ही परिचायक था। प्रशासन के इस व्यवहार को लेकर न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज किया गया है। 

2. ‘समर्थ भारत’ - कर्नाटक दक्षिण:- कर्नाटक दक्षिण प्रांत ने एक अभिनव प्रयोग किया। बंगलुरु में ‘समर्थ भारत’ इस संकल्पना से दो दिवसीय चर्चा सत्र का आयोजन किया गया।  

युवाशक्ति, जो देश और समाज के लिए कुछ करना चाहती है, उन्हें चर्चा तथा विचार-विमर्श हेतु मंच उपलब्ध हो इस दृष्टि से ही यह आयोजन किया गया था। सोशल मीडिया द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण हेतु आह्नान किया गया। परिणामतः कर्नाटक दक्षिण प्रांत से

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