शुक्रवार, 27 मार्च 2015

हिन्दू नववर्ष एवं भगवान श्रीराम के जन्मदिन (श्रीरामनवमी) की हार्दिक शुभकामनाएँ- डाॅ0 प्रवीण तोगडि़या

    बन्धुवर,
    जय श्रीराम।  

 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत 2072 शके 1937 युगाब्द 5117 नववर्ष भगवान श्रीराम के जन्मदिन श्रीरामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं। नववर्ष प्रतिपदा के दिन महत्व क्यो?
 हवाओं में परिवर्तन होता है।
पृथ्वी देवी के जीवन दाता सूर्य भगवान् अपने पूर्ण शक्ति से संचरण करते हैं। चैत्र नवरात्रि के निमिŸा माँ भगवती दुर्गा भी पृथ्वी कल्याण हेतु सज्जित होती है। आम पल्लव तथा आम्र पुष्पों का सुगंध लिए नयी ऊर्जा का संचार होता है।
 हिन्दू काल गणना अतिप्राचीन है। सम्पूर्ण विश्व की उत्पŸिा, स्थिति तथा लय के कारक श्रीविष्णु जी उनके नाभिकमल से उत्पन्न ब्रह्मदेव की आयु 100 वर्ष है, किन्तु ब्रह्मदेव द्वारा सृष्टि की रचना की गई। उनका एक दिन हमारी पृथ्वी के मानवों के 432 कोटि सौर वर्ष के बराबर है। इतने कालावधि में 14 मन्वंतर होते हैं। एक मन्वंतर में 71 महायुग होते हैं। हर एक महायुग में 4 युग होते हैं। जब एक मन्वतर पूर्ण होता है, तब दूसरा आरम्भ होने के पहले 17,28,000 वर्ष यानि एक कृत युग जितना संधि काल होता है। ऐसे 71 महायुगों में से 28वां महायुग अब चल रहा है। उसमें कृत युग 17,28,000 वर्ष, त्रेता युग 12,96,000 वर्ष, द्वापर युग 8,64,000 वर्ष ये 3 युग पूर्ण हुए हैं और चैथा कलियुग चल रहा है। इस कलियुग के कुल 4,32,000 वर्ष हैं जिनमें से अब 5114 वर्ष पूर्ण हुए हैं और 4,26,888 वर्ष शेष हैं। मानव के जीवन की तुलना इनसे की तो समझ में आता है की इस पृथ्वी पर मानव जीवन कितना क्षणिक है। ऐसा है तो इतने से समय में हमारी इस दीर्घ समृद्ध परम्परा, संस्कृति और हमारा धर्म इनके संधारण और संवर्धन हेतु हमारा समय तथा हमारे अन्य ऊर्जाओं का और धन का उपयोग करना, यह हम सभी हिन्दुओं का परम कर्Ÿाव्य है।

    मुझे विश्वास है कि आप व्यस्त दैनंदिन जीवन में से समय निकालकर आप इन विषयों पर अवश्य विचार और कृति करेंगे। कलियुग की विशेषता है की प्राचीन धर्म, संस्कृति और परम्पराओं का अनेकानेक कारणों से अपमान होने लगता है। समाज में कई विध्वंसक तत्व पनपने लगते हैं, ऐसे में उद्विग्न, हताश न होकर और हमारे वेदों, भगवानों का, महर्षियांे का, पूर्वजों का, कुलदेवी का स्मरण कर हमारे धर्म की सेवा में हम अविचल रहें, यही प्रार्थना से आपको और आपके परिवार और व्यवसाय को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

नववर्ष का यह दिन कई अन्य कारणों से भी महत्व रखता हैः
v    महाराजा विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय।
v    चक्रवर्ती सम्राट श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक
v    सिंध में जन्में संत झुलेलाल जी का जन्मदिवस
v    सिख गुरु श्री अंगद देवजी का जन्मदिवस
v    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डाॅ. केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।
v    आर्य समाज का स्थापना दिवस।
    चलें हम सब मिलकर नए वर्ष का संकल्प करें:
भारत हिन्दू राष्ट्र है - यही हमारा नारा है।
        सधन्यवाद, पुनः प्रणाम।
                                    भवदीय स्नेहाभिलाषी,


                                    (डाॅ0 प्रवीण तोगडि़या)
                                                     अन्तर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष  


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Sankat Mochan Ashram,
R.K.Puram, Sec.-6
New Delhi-22
Ph.011-26178992, 26103495


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