बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

देश के खेल जगत को सुसंस्कारित करने के लिये क्रीड़ा भारती की प्रयास

 देश के खेल जगत को सुसंस्कारित करने के लिये क्रीड़ा भारती की कसरत
नई दिल्ली (इंविसंके). खेलों के माध्यम से चरित्र निर्माण के ध्येय को समर्पित राष्ट्रीय संस्था ‘क्रीड़ा भारती’ के कार्याध्यक्ष श्री लक्ष्मण राव पार्डीकर और भारत के खेल मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार, 23 फरवरी को देश में खेलों को प्रोत्साहन देने एवं खेल जगत में संस्कारक्षम वातावरण बनाने के लिये पारस्परिक सहयोग के क्षेत्रों की खोज एवं अन्य संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया.
खेल मंत्री के साथ दो दिन चले बैठकों के दो दौर के बाद श्री पार्डीकर ने इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केन्द्र को बताया कि आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर क्रीड़ा भारती सरकार के कार्यक्रमों में पूरा सहयोग प्रदान करेगी. 
उन्होंने कहा कि 21 जून को उनकी संस्था ने पहले से ही देश के 3 हजार 641 स्थानों पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम करने का निश्चय किया है.
श्री पार्डीकर ने बताया कि क्रीड़ा भारती ‘सक्षम महिला- निर्भय महिला’ योजना पर गंभीरतापूर्वक काम कर रही है. इसके अंतर्गत दिल्ली में 150 चयनित महिलाओं को प्रशिक्षक बनाने के लिये प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करने का निर्णय लिया गया है. हरिनगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आगामी 17, 18 व 19 अप्रैल को लगने वाले इस तीन दिवसीय वर्ग में महिलाओं को आत्म- सुरक्षा के उपाय सिखाने के लिये योग्य प्रशिक्षक के रूप में तैयार किया जायेगा. क्रीड़ा भारती ने पिछले दिनों देश के 26 स्थानों पर 3595 महिलाओं को नियुद्ध (जूडो कराटे) आदि का एडवांस प्रशिक्षण दिया था. प्रशिक्षण प्राप्त इन्हीं महिलाओं में से 150 का चयन प्रशिक्षक के रूप में तैयार करने के लिये किया गया है.   
उन्होंने बताया कि ‘क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का’ इस बोध वाक्य के साथ खेलों के माध्यम से आरोग्य संपन्न राष्ट्र निर्माण के लिये क्रीड़ा भारती की स्थापना पुणे (महाराष्ट्र) में वर्ष 1992 में की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य देश के अन्य स्थापित खेलों के साथ स्वदेशी खेलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के परम्परागत खेलों को बढ़ावा देना है, ताकि समाज के सभी वर्ग मैदान पर आकर खेलें तथा खेलों के माध्यम से वे स्वस्थ शरीर, तीक्ष्ण बुद्धि और सुसंस्कार प्राप्त करें.
श्री पार्डीकर ने कहा कि किसी एक खेल का विचार न रखते हुए सभी खेलों का विचार करने वाली संघटना का रूप ‘क्रीड़ा भारती’ है. यह सूर्य नमस्कार सहित सहित सभी प्रचीन व्यायाम पद्धतियों के प्रति समाज की रुचि विकसित करने की दिशा में प्रयासरत है, जिससे समाज साहसी और शक्तिशाली बन सकता है. फिलहाल, यह वर्ष में पांच कार्यक्रमों का आयोजन करती है. श्री हनुमान जयंती पर क्रीड़ा दिवस, 29 अगस्त (मेजर ध्यान चंद का जन्म दिन) को राष्ट्रीय क्रीड़ा दिवस, वीर जीजामाता सम्मान पुरस्कार पर खिलाड़ियों को उनकी माताओं सहित पुरस्कृत किया जाता है. छात्रों में खेलों के प्रति अभिरुचि विकसित करने के लिये क्रीड़ा प्रबोध परीक्षा का आयोजन और माघ शुद्ध सप्तमी (सूर्य सप्तमी) पर जागतिक सूर्य नमस्कार दिवस मनाया जाता है. इसके अतिरिक्त कार्यक्रमों में रिले अल्ट्रा मैराथन, संगोष्ठियों और क्रीड़ा साहित्य सम्मेलनों का आयोजन भी शामिल है.
उन्होंने यह भी बताया कि 24 जून 2009 को क्रिकेट खिलाड़ी श्री चेतन चौहान की अध्यक्षता में क्रीड़ा भारती ने अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण किया. इससे पूर्व 1992 से यह महाराष्ट्र में कार्य कर रही थी. लेकिन अब 22 हजार 105 सदस्यों सहित क्रीड़ा भारती की 439 जिलों और 41 महानगरों में इकाइयां और संयोजक सक्रिय हैं. इनमें दो हजार से अधिक महिला सदस्य हैं.

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